गुवाहाटी,03 मई (आरएनएस)। असम में किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला सोमवार को मतगणना के बाद होगा. यह तय होगा कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को तीसरा कार्यकाल मिलेगा या हफ्तों से जारी खींचतान के बाद कांग्रेस सत्ता छीनने में सफल रहेगी. अधिकांश एग्जिट पोल ने असम में एनडीए सरकार बनने का आकलन किया है. असम में नौ अप्रैल को मतदान हुआ था.
असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूरे राज्य में पहचान की राजनीति, कल्याणकारी योजनाओं का वितरण और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का जोर देखा गया. 9 अप्रैल को एक ही चरण में हुए मतदान में असमिया मतदाताओं, बंगाली भाषी और असमिया मुस्लिम, चाय बागानों में रहने वाली जनजातियों और स्वदेशी आदिवासी समूहों सहित विभिन्न समुदायों से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चुनाव परिणामों को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाने की उम्मीद है.
राज्य की 126 विधानसभा सीट पर 722 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा, जिसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर ईवीएम खोली जाएंगी. दिग्गज उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, कांग्रेस उम्मीदवार गौरव गोगोई, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और रायजोर दल नेता अखिल गोगोई शामिल हैं.
प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कई चेहरे हैं.
एनडीए के लिए एजीपी प्रमुख अतुल बोरा एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं. एजीपी का प्रदर्शन यह संकेत देगा कि क्या क्षेत्रीय असमिया राष्ट्रवाद का एनडीए के व्यापक ढांचे के भीतर अभी भी मजबूत प्रभाव है. भाजपा-एजीपी गठबंधन ने विकास की राजनीति और क्षेत्रीय पहचान संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर बहुत जोर दिया है.
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई असम में प्रमुख विपक्षी चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं. वह पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र हैं. उन्होंने चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधनों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.गोगोई ने बेरोजगारी, महंगाई और भाजपा सरकार के तहत बढ़ते राजनीतिक केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर आक्रामक रूप से प्रचार किया.
असम में विपक्ष के नेता देबब्रता सैकिया हैं. असम की कांग्रेस राजनीति में वह काफी अहम माने जाते हैं. नाजिरा से चुनाव लड़ रहे सैकिया ने अपने अभियान में आर्थिक संकट, बाढ़ प्रबंधन और असमिया पहचान की रक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है.
एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल एक बार फिर चर्चा में हैं. उनका असर लोअर असम में सबसे अधिक है.
रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई असम में सत्ता-विरोधीआवाजों में से एक हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए जाने जाने वाले गोगोई ने खुद को जमीनी स्तर के प्रतिरोध की राजनीति के चेहरे के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है.
असम में इस बार उम्मीदवारों में 59 महिलाएं हैं. नगांव जिले में मतगणना तीन अलग-अलग केंद्रों पर होगी, जबकि कोकराझार, तिनसुकिया और जोरहाट में दो-दो केंद्रों पर मतगणना होगी. मतगणना केंद्रों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) वाले ‘स्ट्रॉन्ग रूमÓ की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 25 कंपनियां तैनात की गई हैं.
अधिकारी ईवीएम को ‘स्ट्रॉन्ग रूमÓ से मतगणना केंद्रों तक ले जाने के लिए 800 और पुलिसकर्मियों को तैनात करेंगे. मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने कहा था कि सीएपीएफ की दो अतिरिक्त कंपनियां स्थायी ड्यूटी पर तैनात रहेंगी. उन्होंने बताया कि राज्य सशस्त्र पुलिस की 93 कंपनियां पहले ही जिलों में तैनात की जा चुकी हैं.
मतगणना के दिन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए 85 ‘असॉल्ट ग्रुप्सÓ की सहायता भी मांगी गई है. राज्य में नौ अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 25 लाख से अधिक मतदाताओं में से 85.96 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
चुनाव में 722 उम्मीदवारों में से कांग्रेस के सबसे अधिक 99 उम्मीदवार हैं. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 90, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के 30, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी असम गण परिषद (अगप) के 26 और बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
विपक्षी गठबंधन में रायजोर दल ने 13 सीट पर, असम जातीय परिषद ने 10 सीट पर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने तीन सीट पर और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस ने दो सीट पर चुनाव लड़ा है.
आम आदमी पार्टी (आप) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने 18-18 सीट पर, तृणमूल कांग्रेस ने 22 सीट पर और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने 16 सीट पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा, 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं.
2021 में एनडीए को 76, यूपीए को 49 और अन्य को एक सीटें मिली थीं.
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