– झोलाछापों के भरोसे चल रहा इलाज
हरगांव/सीतापुर 5 मई (आरएनएस)। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर की सख्ती के दावों के बीच हरगांव क्षेत्र में निजी अस्पतालों की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि बिना डिग्रीधारक लोग खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन तथाकथित अस्पतालों को जिन डॉक्टरों की डिग्री पर लाइसेंस मिला है, वे मौके पर शायद ही कभी मौजूद रहते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि इलाज से लेकर गंभीर मामलों तक की जिम्मेदारी अयोग्य और अप्रशिक्षित लोगों के हाथों में है। सबसे चैंकाने वाली बात यह है कि कई जगह बिना किसी जरूरी सुविधा और विशेषज्ञ डॉक्टर के प्रसव तक कराए जा रहे हैं, जो सीधे-सीधे जिंदगी से खिलवाड़ है। जांचों में बार-बार यह खुलासा हो चुका है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह झोलाछाप इलाज कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इन अस्पतालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? हरगांव क्षेत्र के दतेली मार्ग, लहरपुर मार्ग और सीएचसी मार्ग पर ऐसे अस्पतालों की भरमार है, जो खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कई जगह तो क्लीनिक के नाम पर ही पूरा अस्पताल संचालित किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक संजय गौर से पूछा गया, तो उन्होंने निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन तक की जानकारी से पल्ला झाड़ लिया। यह बयान न सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही और ढिलाई को उजागर करता है।
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कस्बे के समाजसेवी मनोज गुप्ता कहते है की
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही अनजान बने बैठे हैं, तो आम जनता की जिंदगी की सुरक्षा कौन करेगा? प्रशासन की सख्ती आखिर कागजों तक ही सीमित क्यों है? अब जरूरत है कि दिखावे की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कठोर और निर्णायक कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों की जिंदगी के साथ हो रहा यह खतरनाक खेल बंद हो सके।
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