प्रयागराज,लखनऊ 6 मई (आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब लड़ाई केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि साइबर, स्पेस, डेटा नेटवर्क और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम तक फैल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ तकनीकी दक्षता, रणनीतिक सोच और मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही आवश्यक हो गई है। आज के दौर में कीबोर्ड, सैटेलाइट और डेटा भी उतने ही प्रभावी हथियार बन चुके हैं, जितने पारंपरिक सैन्य उपकरण।मुख्यमंत्री प्रयागराज में “रक्षा त्रिवेणी संगम” थीम पर आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तान की तपती रेत, घने जंगलों के अंधकार और समुद्र-आकाश की अनंत चुनौतियों के बीच भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में मुस्तैद रहते हैं, जिनकी वजह से देश सुरक्षित है। अब युद्ध मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के युग में प्रवेश कर चुका है, जहां साइबर और स्पेस जैसे क्षेत्र भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।उन्होंने कहा कि दुश्मन के पावर ग्रिड, राडार, जीपीएस, बैंकिंग और संचार नेटवर्क को बाधित करना तथा अपने सिस्टम को सुरक्षित और अभेद्य बनाए रखना आधुनिक सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। सैटेलाइट्स अब युद्ध की आंख और दिमाग की तरह कार्य कर रहे हैं और डेटा के माध्यम से भी लड़ाई लड़ी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कुछ वर्षों पहले भारत का रक्षा निर्यात लगभग 600 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत अब मित्र देशों को रक्षा उत्पाद उपलब्ध करा रहा है और इस दिशा में उत्तर प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में विकसित हो रहा उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर के छह प्रमुख नोड्स—लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट—पर तेजी से कार्य हो रहा है और 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर रहे हैं। अलीगढ़ छोटे हथियारों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बन रहा है, जबकि कानपुर गोला-बारूद, मिसाइल और डिफेंस टेक्सटाइल का हब बन रहा है। लखनऊ और झांसी में ब्रह्मोस मिसाइल और भारी रक्षा उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं चित्रकूट और आगरा में एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विकास जारी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत तोप के गोले, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा वर्कफोर्स और 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के साथ मजबूत औद्योगिक आधार मौजूद है। सरकार स्किल, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के माध्यम से इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स तैयार कर रही है। इसी क्रम में आईआईटी कानपुर के सहयोग से ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया गया है।
उन्होंने भारतीय परंपरा “आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:” का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसे स्वीकार करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इस सिम्पोजियम को उन्होंने ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 21 हजार से अधिक स्टार्टअप स्थापित हुए हैं, जो एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर जीरो टॉलरेंस नीति ने प्रदेश को नई पहचान दी है और आज यूपी निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन चुका है।उन्होंने कहा कि भारत “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना में विश्वास करता है, लेकिन अपनी उदारता की रक्षा के लिए सामरिक शक्ति का होना भी जरूरी है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकरÓ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और क्षमा की भाषा वही प्रभावी ढंग से बोल सकता है, जिसके पास पर्याप्त शक्ति हो। भारत अपनी शक्ति इसलिए बढ़ा रहा है ताकि उसकी उदारता को कोई कमजोरी न समझे।इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, लेफ्टिनेंट जनरल वी. हरिहरन, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, एसआईडीएम के वाइस प्रेसिडेंट नीरज गुप्ता, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ए.के. घोष सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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