लखनऊ 6 मई (आरएनएस )। अपराधों की आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट लगातार तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में 6 मई 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन्स सभागार में “डिजिटल/कम्प्यूटर फॉरेंसिक” विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार और पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जबकि संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में किया गया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण और विधिक प्रक्रियाओं की बारीकियों से अवगत कराना था, ताकि विवेचना को आधुनिक तकनीक के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसमें साइबर अपराधों में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने और उन्हें न्यायालय में सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के तरीकों पर विशेष जोर दिया गया।इस प्रशिक्षण में कुल 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। सत्र का संचालन वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने किया, जिन्होंने अपने अनुभव के आधार पर डिजिटल फॉरेंसिक के जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधों के खुलासे में डिजिटल फॉरेंसिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।प्रशिक्षण के दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से साक्ष्य एकत्र करने की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तार से चर्चा की गई। ‘हैश वैल्यूÓ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि साक्ष्य की मौलिकता सुनिश्चित करने में इसकी अहम भूमिका होती है। साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र की कानूनी प्रक्रिया के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।कार्यशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी प्रमुखता दी गई। विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से यह बताया गया कि घटनास्थल से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को किस प्रकार जब्त किया जाए और सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाया जाए। मोबाइल डेटा रिकवरी और क्लाउड स्टोरेज से साक्ष्य निकालने की तकनीकों पर भी चर्चा हुई।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा और अपराधियों के खिलाफ सजा की दर में वृद्धि होगी। साथ ही थानों को आधुनिक फॉरेंसिक किट और संसाधनों से लैस करने की भी योजना है।कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। यह प्रशिक्षण लखनऊ पुलिस को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है, जिससे भविष्य में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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