उत्तरकाशी,07 मई (आरएनएस)। वनाग्नि का बड़ा कारण पिरूल अब ग्रामीण महिलाओं की आय का जरिया बनेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से वन विभाग दस रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदेगा। पिरूल एकत्रीकरण के लिए विकास खंड स्तर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित समूह की महिलाएं पिरूल एकत्रीकरण के तैयार हुई हैं जिन्होंने 1200 क्विंटल पिरूल एकत्र करने की हामी भरी है। अपर यमुना वन प्रभाग के मुंगर संती, कुथनौर, रवांई और नौगांव रेंज से जुड़ी वन पंचायतों के साथ मिलकर पिरूल एकत्रीकरण की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। पिरूल एकत्रीकरण से जहां महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा वहीं वनाग्नि पर भी अंकुश लगेगा। जानकारों का मानना है कि चीड़ के पत्तियों की मोटी परत बारिश के पानी को जमीन के अंदर जाने से रोकती है। इससे न तो समय पर पानी के स्रोत रिचार्ज हो पाते हैं और न ही पशुओं के लिए घास उग पाती है। खंड विकास अधिकारी विजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पिरूल संग्रहण एवं मूल्य संवर्धन आजीविका योजना के तहत समूह की महिलाएं फायर सीजन में पिरूल एकत्र कर संग्रह केंद्र तक पहुंचाएंगी।
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