—- 40 गांवों की पुकार पर भारी रेलवे की बेरुखी, तरयासुजान से बिना रुके गुजर रही गोमती।
कुशीनगर, 21 मई (आरएनएस)। जिले के अंतिम छोर पर बसे तरयासुजान क्षेत्र की जनता आज भी रेलवे की बेरुखी का दंश झेल रही है। छपरा – गोमती एक्सप्रेस के ठहराव की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने जुलूस निकाला, हस्ताक्षर अभियान चलाया, जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई, यहां तक कि सांसद देवरिया शशांक मणि त्रिपाठी ने स्वयं रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर तरयासुजान रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव की मांग की, लेकिन छह माह बाद भी हालात जस के तस है।
जनता का आरोप है कि रेलवे विभाग आम लोगों की जरूरतों को नजर अंदाज कर सिर्फ फाइलों में योजनाएं दौड़ा रहा है, जबकि जमीन पर हजारों लोग रोज परेशानी झेलने को मजबूर हैं। तरयासुजान स्टेशन से जुड़े लगभग 40 गांवों के लोगों के लिए यह ट्रेन केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि राजधानी लखनऊ तक पहुंचने की जीवनरेखा साबित हो सकती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि छपरा-गोमती एक्सप्रेस का ठहराव यहां हो जाए तो मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ जाने में राहत मिलेगी। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आवागमन आसान होगा और नौकरी-पेशा लोगों का समय व पैसा दोनों बचेंगे। लेकिन रेलवे प्रशासन की उदासीनता ने लोगों की उम्मीदों को निराशा में बदल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं रेल मंत्रालय को पत्र लिख चुके हैं, तब भी कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि अफसरशाही जनसमस्याओं को लेकर कितनी संवेदनहीन हो चुकी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता की मांग पूरी होने के लिए और कितने ज्ञापन, जुलूस और हस्ताक्षर अभियान की जरूरत पड़ेगी? स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ट्रेन ठहराव को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बताया जाता है कि मोहम्मद वसीम बैजनाथ बेजू, अमित तिवारी, संतोष, दीनानाथ गुप्ता सहित तमाम लोगो ने देवरिया सांसद से मिलकर न सिर्फ यहा ट्रेन ठहराव की गुहार लगायी थी बल्कि समय समय पर धरना-प्रदर्शन व हस्ताक्षर अभियान भी चलाया इसके बावजूद रेलवे प्रशासन कुंभकर्णी निद्रा मे पडा है। अब क्षेत्र की निगाहें रेलवे मंत्रालय पर टिकी हैं कि वह जनता की जरूरत समझेगा या फिर तरयासुजान के लोगों को यूं ही उपेक्षा का शिकार होना पड़ेगा।
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