लखनऊ,30 मई(आरएनएस) । कैंसर उपचार में आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है। लखनऊ स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर से पीडि़त 35 वर्षीय मरीज का ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (टीओआरएस) के माध्यम से सफल उपचार किया गया। अत्याधुनिक रोबोटिक प्रक्रिया के जरिए बिना किसी बाहरी कट, बिना दिखाई देने वाले निशान और कम रिकवरी समय में ट्यूमर को सटीक तरीके से हटाया गया।बहराइच निवासी शकील अहमद पिछले कई सप्ताह से लगातार गले में दर्द और निगलने में परेशानी से जूझ रहे थे। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य संक्रमण समझकर अनदेखा किया, लेकिन समस्या बढऩे और दैनिक कार्यों के साथ खानपान में बाधा उत्पन्न होने पर उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श लिया।मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद शकील अहमद को स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर होने की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार टॉन्सिल कैंसर, हेड एंड नेक कैंसर का एक प्रकार है, जिसका समय पर उपचार न होने पर बोलने, निगलने और जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।मरीज का उपचार सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. कमलेश वर्मा और उनकी बहु-विषयक कैंसर विशेषज्ञ टीम की देखरेख में किया गया। ट्यूमर की स्थिति और कैंसर की अवस्था को देखते हुए विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक दा विंची सर्जिकल सिस्टम की सहायता से ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया के तहत गर्दन के लिम्फ नोड्स को छोटे चीरे के माध्यम से हटाया गया, जबकि टॉन्सिल ट्यूमर को रोबोटिक तकनीक से निकाला गया। इससे शरीर पर बहुत कम निशान रहे और मरीज की रिकवरी अपेक्षाकृत तेज रही।डॉ. कमलेश वर्मा ने बताया कि ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी हेड एंड नेक कैंसर के उपचार में एक बड़ी प्रगति मानी जा रही है। उनके अनुसार कुछ चुनिंदा मरीजों में यह तकनीक लंबे समय तक चलने वाली कीमोथेरेपी अथवा रेडिएशन थेरेपी की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर सकती है और कुछ मामलों में इससे बचाव भी संभव है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें चेहरे पर किसी प्रकार का बाहरी कट या दिखाई देने वाला निशान नहीं रहता, जिससे मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट पाते हैं और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।अस्पताल प्रशासन के अनुसार इस न्यूनतम हस्तक्षेप वाली तकनीक से शरीर के ऊतकों को कम नुकसान पहुंचा, ऑपरेशन के बाद दर्द कम रहा तथा रिकवरी का समय भी काफी घट गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और वह तीन से चार दिनों के भीतर स्थिर हो गए। कुछ समय बाद उन्होंने सामान्य रूप से भोजन लेना भी शुरू कर दिया तथा रिकवरी के दौरान उन्हें अपेक्षाकृत कम परेशानी का सामना करना पड़ा।विशेषज्ञों का कहना है कि हेड एंड नेक कैंसर, जिसमें टॉन्सिल कैंसर भी शामिल है, अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से सामने आ रहा है। तंबाकू सेवन, धूम्रपान, मदिरा सेवन और एचपीवी संक्रमण इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि लगातार गले में दर्द, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या गर्दन में बिना कारण सूजन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते जांच करानी चाहिए।अस्पताल का कहना है कि रोबोटिक सहायता प्राप्त कैंसर सर्जरी के सफल उपयोग के साथ लखनऊ में उन्नत कैंसर उपचार सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और प्रभावी परिणाम मिल सकें।
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