लखनऊ,30 मई(आरएनएस)। मोहनलालगंज थाना पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक भूमि हड़पने के कथित षड्यंत्र में शामिल दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और उनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी।पुलिस के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को ख्यालीगंज, कैसरबाग निवासी समीर मिर्जा की शिकायत पर मोहनलालगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्राम अमेठी, तहसील मोहनलालगंज स्थित उनकी पैतृक भूमि पर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अवैध दावा प्रस्तुत करते हुए कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।विवेचना के दौरान सामने आया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद फरीद मिर्जा ने स्वयं को वादी के दिवंगत चाचा खुसरू मिर्जा का वारिस दिखाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आरोप है कि इसके लिए उसने वास्तविक पारिवारिक विवरण छिपाकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र तथा अन्य दस्तावेज तैयार कर न्यायालय और अन्य मंचों पर प्रस्तुत किए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी जीवित मां को मृत दर्शाते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया और कथित दफन से संबंधित भ्रामक दस्तावेजों का भी उपयोग किया।पुलिस के अनुसार संबंधित विभागों और संस्थाओं से प्राप्त रिपोर्ट में इन अभिलेखों के फर्जी और कूटरचित होने की पुष्टि हुई है। साक्ष्य संकलन के दौरान यह भी प्रकाश में आया कि कथित षड्यंत्र में कई अन्य लोगों की सक्रिय भूमिका रही। आरोपियों ने स्वयं को वादी पक्ष का रिश्तेदार बताकर संपत्ति पर दावा मजबूत करने का प्रयास किया तथा भूमि विक्रय अनुबंधों से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।प्रकरण में पूर्व में मोहम्मद फरीद मिर्जा, मोहम्मद अशफाक मिर्जा उर्फ बाबू मियां और कलीम खां को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं फरार चल रहे फुरकान अहमद अब्बासी और अभिषेक यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। इसी क्रम में 29 मई 2026 को मोहनलालगंज थाना पुलिस ने बारादरी चौराहा, कैसरबाग के पास दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फुरकान अहमद अब्बासी निवासी कस्बा अमेठी, थाना गोसाईगंज और अभिषेक यादव निवासी मुंशीगंज, कस्बा अमेठी, थाना गोसाईगंज के रूप में हुई है। दोनों प्रॉपर्टी डीलर बताए जा रहे हैं।पुलिस ने बताया कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मामले में आगे की विवेचना जारी है।
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