लखनऊ ,06 जून(आरएनएस)। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने विद्युत चोरी से जुड़े मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के उत्तरदायित्वों का स्पष्ट निर्धारण किया है। इस संबंध में 08 फरवरी 2022 को जारी कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से यह व्यवस्था की गई है कि विद्युत चोरी के मामलों में 24 घंटे की निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राथमिकी दर्ज न होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्युत चोरी निरोधक पुलिस थानों (्रक्कञ्जक्कस्) में तहरीर दिए जाने के बावजूद यदि 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज नहीं होती है, अथवा निर्धारित समय सीमा के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है, तो इसके लिए विभिन्न स्तर पर मुख्य उत्तरदायित्व, पर्यवेक्षणीय उत्तरदायित्व और प्रशासकीय उत्तरदायित्व तय होंगे। इसमें विभागीय रेड टीम, सतर्कता इकाई की रेड टीम तथा संयुक्त टीमों की भूमिका के आधार पर अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।निर्देशों के अनुसार उपखण्ड अधिकारी (वितरण), अधिशासी अभियंता (वितरण), विद्युत चोरी निरोधक थानों के प्रभारी अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (सतर्कता) तथा अपर पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) सहित संबंधित अधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार उत्तरदायी बनाया गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक स्तर पर पर्यवेक्षणीय और प्रशासकीय जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मामलों में लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।इसके अतिरिक्त यह भी प्रावधान किया गया है कि सभी प्रकरणों में आरएमएस पोर्टल पर दर्ज आंकड़े ही अंतिम माने जाएंगे और इनकी प्रविष्टि एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। इससे विद्युत चोरी से संबंधित मामलों की निगरानी और पारदर्शिता को और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।कारपोरेशन ने निर्देश दिया है कि इस व्यवस्था की जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाए तथा उनसे इसकी प्राप्ति की पुष्टि लेकर अभिलेखों में सुरक्षित रखी जाए।इस आदेश को विद्युत वितरण व्यवस्था में अनुशासन, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे विद्युत चोरी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
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