नई दिल्ली,10 जून(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबसे लंबे हाथी रमन के कमर्शियल इस्तेमाल की बुराई की है, जबकि इस तरह के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऑर्डर दिया गया था. इस बात पर जोर देते हुए कि वह इस तरह की नाफरमानी पर आँखें नहीं मूंद सकता और जब बेजुबान जानवरों की भलाई की बात हो तो मूक दर्शक नहीं बना रह सकता, सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को हाथी की भलाई को लेकर उसे कुछ समय के लिए अपनी कस्टडी में लेने का निर्देश दिया. कैद में रखे गए हाथी रमन को लेकर विवाद लंबा और उतार-चढ़ाव वाला रहा है, जो ट्रायल कोर्ट और केरल हाई कोर्ट में कई दौर की केस लड़ चुका है.
मंगलवार को दिए गए फैसले में जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने राज्य को रमन को एक सही रेस्क्यू या रिहैबिलिटेशन सेंटर में रखने का आदेश दिया. जस्टिस शर्मा, जिन्होंने बेंच की ओर से फैसला लिखा, ने कहा, यह सच में बहुत बुरा है कि जिस हाथी की बात हो रही है, यानी रमन जो केरल का सबसे लंबा हाथी भी है, उसका कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि इस तरह के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश है और वह भी इस कोर्ट के सामने दिए गए अंडरटेकिंग के आधार पर.
बेंच ने कहा कि एक खास अंडरटेकिंग थी कि हाथी का इस्तेमाल कमर्शियल या मंदिर के कामों के लिए नहीं किया जाएगा. बेंच ने कृष्णनकुट्टी को जिसने एक विवादित वसीयत के आधार पर हाथी की कस्टडी अपने पास रखी थी, सुप्रीम कोर्ट को दिए गए अंडरटेकिंग का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए कंटेम्प्ट का दोषी पाया. बेंच ने उस पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया.
बेंच ने कहा कि रमन को उसके निर्देशों का उल्लंघन करते हुए मंदिर के जुलूसों और रस्मों में घुमाया गया. बेंच ने कहा, यह साफ है कि जिस हाथी रमन की बात हो रही है, उसे वाकई बाहर निकाला गया और रस्मों में इस्तेमाल किया गया जो इस कोर्ट के सामने रेस्पोंडेंट नंबर 1 की ओर से दिए गए अंडरटेकिंग का उल्लंघन था.
जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर कोर्ट इस तरह की अवज्ञा को अनदेखा करता है तो वह बेजुबानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहेगा. जस्टिस शर्मा ने कहा, हम मूक दर्शक नहीं रह सकते, खासकर बेजुबान जानवरों से जुड़े मामलों में जिनकी भलाई भी सबसे जरूरी है.
बेंच ने कहा कि जिस हाथी की कस्टडी की बात हो रही है, उस पर अभी आखिरी फैसला होना बाकी है. बेंच ने कहा कि जिस हाथी की बात हो रही है, उसकी सेहत और पूरी भलाई को प्राथमिकता देने के लिए, केरल सरकार को रमन की कस्टडी लेने और उसे एक सही रेस्क्यू/रिहैबिलिटेशन सेंटर में रखने का निर्देश देना सही लगता है.
बेंच ने कहा कि केरल अपने खर्चे पर हाथी की कुछ समय के लिए देखभाल भी कर सकता है, ऐसे में वह वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत कानूनी सुरक्षा उपायों के अनुसार सही प्रशासनिक आदेश दे सकता है. बेंच ने कहा, यह साफ किया जाता है कि यह व्यवस्था सिर्फ कुछ समय के लिए है और यह इस कोर्ट द्वारा अंतरिम कस्टडी के मुद्दे पर दिए गए आखिरी ऑर्डर के अधीन होगी, जब तक कि अपील में फैसला नहीं हो जाता.
जयकृष्ण मेनन ने कंटेम्प्ट पिटीशन फाइल की थी, जिसमें दावा किया गया था कि रमन माता अमृतानंदमयी मठ से जुड़ा था और उसे सिर्फ कुछ समय के लिए कृष्णनकुट्टी को देखभाल और रखरखाव के लिए सौंपा गया था. आरोप है कि कृष्णनकुट्टी ने हाथी को गैर-कानूनी तरीके से अपने पास रखा और फरवरी 2017 में कथित तौर पर जाली गिफ्ट डीड के जरिए मालिकाना हक जताया.
कृष्णनकुट्टी ने दावा किया कि उन्हें हाथी कानूनी तौर पर गिफ्ट में मिला था और वह एक दशक से ज़्यादा समय से उसकी देखभाल कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हाथी का इस्तेमाल किसी भी मनाही वाली एक्टिविटी में नहीं किया गया और उनके खिलाफ सबूत पुराने मामलों से जुड़े हैं.
बेंच ने राज्य अधिकारियों को कंटेम्प्ट की कार्रवाई से बरी कर दिया. बेंच ने कहा कि उन्होंने हाथी का इंस्पेक्शन करने की कोशिश की थी, हालांकि जानवर के बीमार होने की वजह से प्रोसेस में देरी हुई. आखिरकार 3 फरवरी, 2026 को इंस्पेक्शन किया गया.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रमन की सेहत की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश दिए थे. इसने सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों को उसकी सेहत का इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया था और यह भी लिखा गया था कि हाथी कमर्शियल या मंदिर की एक्टिविटी में हिस्सा नहीं लेगा. बेंच ने कहा कि रमन को ‘मस्तÓ हालत में चवक्कड़ के पास एक मंदिर के त्योहार में ले जाया गया और जुलूस में इस्तेमाल किया गया, जो सीधे तौर पर अंडरटेकिंग का उल्लंघन है.
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