लखनऊ ,13 जून(आरएनएस)।राजधानी की मडिय़ांव पुलिस और अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने नकली भारतीय मुद्रा तैयार कर बाजार में खपाने वाले गिरोह के एक वांछित सदस्य को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। वर्ष 2023 में दर्ज जाली नोटों के एक चर्चित मुकदमे में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया। आरोपी पर अपने साथियों के साथ मिलकर नकली करेंसी तैयार करने और उसे बाजार में चलाकर आर्थिक लाभ अर्जित करने का आरोप है।पुलिस के अनुसार 28 मार्च 2023 को जाली नोटों की बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर थाना मडिय़ांव में मुकदमा संख्या 442/2023 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए, 489बी, 489सी एवं 489डी के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में विकास दूबे उर्फ अजय कुमार दूबे सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि गिरोह में कई अन्य लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश लगातार की जा रही थी।पुलिस अधिकारियों के अनुसार 12 जून 2026 को थाना मडिय़ांव पुलिस टीम क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, वांछित अभियुक्तों की तलाश और नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान भिठौली तिराहे के पास पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली कि जाली नोट प्रकरण में वांछित चल रहा एक आरोपी आईआईएम तिराहे के निकट दुबग्गा जाने वाली सड़क पर मौजूद है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।पूछताछ के दौरान पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान सुमित यादव उर्फ मोनू पुत्र सोने लाल निवासी ग्राम दरगवां, थाना अकबरपुर, जनपद कानपुर देहात के रूप में बताई। पुलिस ने उसे वर्ष 2023 में दर्ज जाली नोटों के मुकदमे में वांछित होने की जानकारी देते हुए विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि इस मामले में उसके अन्य कई साथी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और अब गिरोह के नेटवर्क से जुड़ी शेष कडिय़ों की भी जांच की जा रही है।जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर नकली भारतीय मुद्रा तैयार करता था और उसे विभिन्न बाजारों तथा लेन-देन के माध्यम से चलाने का प्रयास करता था। गिरोह के सदस्य नकली नोटों के बदले असली मुद्रा प्राप्त करते थे और बाद में उस रकम का आपस में बंटवारा कर अपना खर्च चलाते थे। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से नकली मुद्रा के कारोबार में लिप्त था।गिरफ्तार आरोपी सुमित यादव उर्फ मोनू का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके विरुद्ध कानपुर नगर के सजेती थाने में वर्ष 2019 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित मुकदमा दर्ज है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 में भी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई से संबंधित एक अन्य मामला दर्ज किया गया था। पुलिस अब उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अन्य जनपदों और थानों से भी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकली नोटों का कारोबार देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों तथा उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नकली नोट तैयार करने के लिए उपकरण और सामग्री कहां से लाई जाती थी तथा इन नोटों को किन-किन क्षेत्रों में खपाया गया।गिरफ्तारी की इस कार्रवाई में थाना मडिय़ांव पुलिस और अपराध शाखा की टीम ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी करते हुए आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
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