श्रीनगर,29 जून(आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर पुलिस स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने 35 साल से ज्यादा समय से कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या और किडनैपिंग के मामले में सबूतों को इक_ा किया. इस मामले में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चीफ यासीन मलिक और उसके चार साथियों का नाम शामिल है.
स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) श्रीनगर की स्पेशल कोर्ट में महिला नर्स की हत्या और किडनैपिंग की 737 पेज की डिटेल्स वाली चार्जशीट फाइल करने वाली है. जांच से पता चला है कि मलिक जो 2019 से दिल्ली की अति सुरक्षित तिहाड़ जेल में बंद है. वह उम्रकैद की सजा काट रहा है.
इसके अलावा उसके साथी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के पूर्व चीफ अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ उर्फ इदरीस भी हत्या और किडनैपिंग को अंजाम देने और उसकी प्लानिंग में शामिल थे. शेख और इदरीस 90 के दशक में मारे गए थे, जबकि टपलू की 2018 में सामान्य मौत हो गई थी.
हालांकि, माना जाता है कि पांचवां आरोपी खुर्शीद अहमद चालकू पाकिस्तान भाग गया. उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा रहा है और उसके और मलिक के खिलाफ भगौड़ा घोषित करने की कार्यवाही शुरू होने की संभावना है, ऐसा सूत्रों ने का कहना है.
सरला भट्ट को 18 अप्रैल 1990 को श्रीनगर के सौरा में शेर-ए-कश्मीर मेडिकल साइंस छात्रावास परिसर से जेकेएलएफ से जुड़े आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था. गोलियों से छलनी उसका शव अगले दिन अस्पताल से कुछ किलोमीटर दूर एक नोट के साथ मिली थी, जिसमें उसे मुखबिर बताया गया था.
पुलिस स्टेशन निगीन में केस दर्ज किया गया था, लेकिन अपराधियों का पता नहीं चल सका लेकिन पुलिस ने 2023 में केस फिर से खोला और आतंकी साजिश का पता लगाने के लिए इसे एसआईए को सौंप दिया. 2025 में एसआईए ने श्रीनगर के मैसूमा में मलिक के घर समेत आठ जगहों पर छापेमारी की थी.
अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोष साबित करने वाले सबूत हाथ लगे थे. पिछले एक साल में जांच करने वालों ने केस के लिए लोगों से जानकारी लेकर उन्हें ट्रैक करके क्राइम सीन रीक्रिएट किया. मलिक को दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने टेरर फंडिंग केस में दोषी ठहराया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
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