एलएलएम प्रवेश बंद करने और आरक्षण नीति की अनदेखी के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
सिरसा 6 जुलाई (आरएनएस)। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा द्वारा एलएलएम (2 वर्षीय) पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ न किए जाने तथा यूजीसी के आरक्षण संबंधी दिशा-निदेर्शों की कथित अनदेखी के विरोध में उदय संस्था ने सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। उदय के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम ने कहा कि संगठन पिछले कई दिनों से लगातार इन दोनों गंभीर मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष आवाज उठाता रहा है। संगठन ने एलएलएम प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने तथा यूजीसी के 16 फरवरी 2026 के दिशा-निदेर्शों के अनुरूप अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नीति लागू करने की मांग को लेकर एक के बाद एक कई ज्ञापन कुलपति को सौंपे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में कुलपति से हुई मुलाकात में भी दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उस दौरान कुलपति ने स्पष्ट निर्णय देने के बजाय कहा था कि करीब 10 दिनों बाद इस विषय पर विचार किया जाएगा तथा एक समिति जो निर्णय लेगी, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। उनका कहना है कि इतने गंभीर और संवेदनशील विषयों पर केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ठोस समाधान चाहिए, न कि अनिश्चित प्रतीक्षा। मांगे राम ने कहा कि विश्वविद्यालय का एलएलएम (2 वर्षीय) पाठ्यक्रम पिछले लगभग 20 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित होता रहा है। पिछले शैक्षणिक सत्र में स्वयं कुलपति ने विद्यार्थियों की बढ़ती मांग को देखते हुए एलएलएम में 10 अतिरिक्त सीटों की स्वीकृति भी प्रदान की थी। ऐसे में इस वर्ष बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रवेश प्रक्रिया रोक देना हजारों विधि स्नातकों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एडजंक्ट फैकल्टी एवं प्रोफेसर ऑफ प्रेक्टिस के भर्ती विज्ञापन जारी किए, जिनमें रिक्त पदों की संख्या, आरक्षण रोस्टर तथा एस सी, एसटी, ओबीसी, ईवीएस एवं पीडब्ल्यूडी वर्गों के लिए आरक्षण संबंधी प्रावधानों का उल्लेख नहीं किया गया। जबकि यूजीसी के 16 फरवरी 2026 के दिशा-निर्देश 45 दिन या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नीति लागू करने की अपेक्षा करते हैं। इस अवसर पर मांगे राम ने कहा कि हमने आंदोलन नहीं, संवाद का रास्ता चुना। बार-बार ज्ञापन दिए, तथ्यों और नियमों के साथ अपनी बात रखी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन गंभीर मुद्दों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया। जब विद्यार्थियों के भविष्य और संविधान प्रदत्त अधिकारों से जुड़े प्रश्नों पर भी केवल आश्वासन मिलता रहा, तब हमें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और विधि के शासन की स्थापना के लिए है। यदि विश्वविद्यालय यूजीसी के दिशा-निदेर्शों और आरक्षण नीति का प्रभावी पालन नहीं करता, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र एलएलएम प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करता, भर्ती विज्ञापनों में आवश्यक संशोधन कर आरक्षण नीति का पालन सुनिश्चित नहीं करता तथा विद्यार्थियों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेता, तो आंदोलन को विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से पूरे प्रदेश स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।
सिरसा, 6 जुलाई। फोटो:06
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