विकासनगर,10 जुलाई(आरएनएस)। बरसात के मौसम में कद्दूवर्गीय सब्जियों लौकी, तोरई, खीरा, कद्दू, करेला, परवल के पौधों में फूल और फल नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी की सब्जी विशेषज्ञ ने किसानों को उचित प्रबंधन की सलाह दी है।केंद्र की सब्जी विशेषज्ञ डॉ. बिजेता ने बताया कि कद्दूवर्गीय फसलों में शुरुआत में केवल नर फूल आना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। पौधे लगाने के लगभग छह से आठ सप्ताह बाद मादा फूलों की संख्या बढऩे लगती है और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। लिहाजा शुरुआती नर फूलों को देखकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि खेत में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, विशेषकर यूरिया का अधिक प्रयोग किया जाता है तो पौधे में पत्तियों और बेल की वृद्धि तो तेजी से होती है, लेकिन फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। ऐसे में किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाते हुए नाइट्रोजन की मात्रा सीमित रखनी चाहिए तथा फास्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरकों एवं जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाना चाहिए। बताया कि अत्यधिक गर्मी (35 डिग्री सेल्सियस से अधिक) अथवा बहुत कम तापमान (18 डिग्री सेल्सियस से कम) होने पर मादा फूलों का विकास प्रभावित होता है और कई बार फूल झड़ भी जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी में पोटाश, फास्फोरस तथा सूक्ष्म पोषक तत्व बोरोन की कमी होने पर भी फूल बनने और फल लगने में समस्या आती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कद्दूवर्गीय सब्जियों की अच्छी वृद्धि के लिए प्रतिदिन कम से कम छह से आठ घंटे सीधी धूप मिलना आवश्यक है। छायादार स्थान पर पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन कम मिलता है। उन्होंने बताया कि जड़ों के बेहतर विकास तथा मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के प्रभावी अवशोषण के लिए ह्यूमिक एसिड का प्रयोग लाभकारी होता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

