0 सनातन बोर्ड गठन और धार्मिक शिक्षा की उठाई मांग
रायपुर, 12 जुलाई (आरएनएस)। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान शिक्षा, सनातन संस्कृति, धर्मांतरण और सामाजिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों को आर्थिक सफलता तो सिखाई जा रही है, लेकिन गीता, महाभारत और भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं दिया जा रहा, जिससे नैतिक मूल्यों में कमी आ रही है।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि बच्चों में चरित्र निर्माण के लिए धार्मिक और नैतिक शिक्षा आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने सनातन बोर्ड के गठन की मांग करते हुए कहा कि गुरुकुलों और मंदिरों को भी संस्थागत समर्थन मिलना चाहिए।
देवकी नंदन ठाकुर ने हाल के कुछ चर्चित हत्या मामलों और युवाओं की बदलती जीवनशैली का उल्लेख करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोडऩे की आवश्यकता है।
धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी का धर्म परिवर्तन कराने में विश्वास नहीं रखती। उनका मत था कि यदि युवा गीता का अध्ययन करेंगे तो वे सनातन संस्कृति और उसके मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
स्कूलों में दी जा रही शिक्षा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल मनोरंजन आधारित गतिविधियों तक सीमित न रखकर सावित्री, सीता और रानी लक्ष्मीबाई जैसे प्रेरणादायक चरित्रों से परिचित कराया जाना चाहिए ताकि उनमें नैतिकता और संस्कार विकसित हों।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संसद में धार्मिक और चरित्रवान व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने सामाजिक मुद्दों जैसे लिव-इन रिलेशनशिप, वेश्यावृत्ति और समलैंगिकता से जुड़े कानूनों पर भी अपनी व्यक्तिगत राय रखी।
राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी के सवाल पर देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यदि प्रधानमंत्री मौन हैं, तो संभवत: वे भविष्य में कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत अनुमान है।
त्रिपाठी
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