अयोध्या,11 जुलाई(आरएनएस)। अयोध्या के राम मंदिर में चल रहे दान विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान की गणना के नए नियम लागू किए हैं। संशोधित दिशानिर्देशों में कड़ी सुरक्षा जांच, बेहतर निगरानी और कर्मचारियों द्वारा दान को संभालने के तरीके में बदलाव शामिल हैं। अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही दान में आई राशि और गहनों की गणना की जाएगी। इसी तरह कर्मचारियों की ड्रेस में भी बदलाव किया गया है।
ट्रस्ट ने गणना करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए गहरे नीले रंग की बिना जेब वाली पोशाक अनिवार्य की है ताकि कोई भी कैश छिपा न सके। इसी तरह गणना के समय कर्मचारी मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा सकेंगे और उन्हें नंगे पांव ही आना होगा। इसी तरह अब टेबल-कुर्सी के बजाय कर्मचारी फर्श पर बिछी प्लाईवुड और गद्दों पर बैठकर नोटों की गिनती करेंगे। ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों को आपस में बातचीत करने की अनुमति भी नहीं होगी।
अब कर्मचारियों के बार-बार वॉशरुम जाने, कैंटीन में ज्यादा देर रुकने या लंबे ब्रेक लेने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब चढ़ावे की गिनती 2 पारियों के बजाय केवल सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट में की जाएगी। इसी तरह पहले गिनती के काम में हाउसकीपिंग स्टाफ की भी मदद ली जाती थी, लेकिन अब उन्हें इस काम से हटाकर वापस उनकी मूल ड्यूटी पर भेज दिया गया है।
ट्रस्ट ने कर्मचारियों की गणना हॉल में प्रवेश और बाहर निकलते समय 2 बार गहन तलाशी लागू की है। कर्मचारियों के लिए पुलिस सत्यापित चरित्र प्रमाण पत्र भी अनिवार्य किया गया है। पारदर्शिता के लिए कर्मचारियों को क्यूआर-सक्षम पहचान पत्र देने और डिजिटल ट्रैकिंग का इस्तेमाल भी किया जाएगा। पूरे गणना कक्ष को 24 घंटे सीसीटीवी की कड़े पहरे में रखा गया है। सीसीटीवी पर नजर करने वाले सुरक्षाकर्मी भी ड्यूटी के दौरान अपनी सीट नहीं छोड़ पाएंगे।
वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब मंदिर से जुड़े हर बैंक लेनदेन पर तीन अधिकृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना कोई लेनदेन संभव नहीं होगा। ऐसे में किसी भी गड़बड़ी के लिए तीनों अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
राम मंदिर में चंदा चोरी मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है, जिसने पाया है कि आरोपियों ने 45 दिनों में 70 बार चोरी का प्रयास किया, जो सीसीटीवी में कैद हो गया। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में चोरी के लिए कर्मचारियों की निगरानी में बार-बार हुई चूक को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रस्ट के पूर्व न्यासी डॉ अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी है।
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