लोक संदर्भ संस्था के तत्वाधान में राग_अनुराग 2025 के अंतर्गत साहित्य संगीत का आयोजन
प्रयागराज 9 नवंबर (आरएनएस ) लोक संदर्भ संस्था के तत्वाधान में राग_अनुराग 2025 के अंतर्गत साहित्य संगीत और नए पुराने साहित्यकारों, कलाकारों का मिलन उक्त कार्यक्रम की विशेषता रही।
सर्वप्रथम मुख्य अतिथि रामनरेश त्रिपाठी पिंडी वासा, डॉ रविनंदन सिंह, संजय पुरुषार्थी, शैलेंद्र मधुर, आभा मधुर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कविता और संगीत के मिलन को यादगार बनाते हुए सर्वप्रथम शैलेन्द्र मधुर ने अपने गीतों गज़़लों से श्रोताओं को आह्लादित कर डाला। क्या हुआ और कैसे यह कब हो गया, तुमने हंसकर के देखा गजब हो गया।
तत्पश्चात प्रख्यात गायक मनोज गुप्ता ने अपनी भजनों पुकारे मन राम ही राम, जगत चला जाए यहां कोई ना रहे, देखो री एक बाल योगी। से श्रोताओं का दिल जीत लिया।
डी,सी पांडे नजर प्रख्यात हास्य कवि ने श्रोताओं को भरपूर हंसाया। उन्होंने कहा कि हम भी गए नहाने संगम क्या बतलाए आपसे। पत्नी ने था ठेल दिया हम गए ना अपने आप से।
प्रख्यात गायक नीरज सिंह ने बॉलीवुड के भजन और गीतों से बॉलीवुड के गीत और भजनों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
जितेंद्र मिश्रा जलज, प्रख्यात गायिका शिखा त्रिपाठी और आयोजक रवि नंदन सिंह,
डॉ आभा मधुर श्रीवास्तव ने अपने गीतों से श्रोताओं को जीवंत कर डाला।
संचालन कर रहे प्रख्यात उद्घोषक चिंतनशील रचनाकार संजय पुरुषार्थ जी ने अपनी कविताओं से राग अनुराग विषय को सार्थक कर डाला।
उक्त कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित करते हुये पारुल सिंह राठौड़ ने साहित्यिकअभिव्यक्ति कर राग़ अनुराग को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।
उक्त कार्यक्रम में शिवराम उपाध्याय मतवाला, अमिताभ त्रिपाठी, शिव मूर्ति सिंह जी आदि मौजूद रहे।
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