लखनऊ 12 नवंबर (आरएनएस ): उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत चल रहे सभी निर्माण कार्यों में उपयोग की जा रही सामग्री उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच हर हाल में की जाए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य विकास अधिकारी और स्टेट क्वालिटी मैनेजर को इस संबंध में पूरी सजगता के साथ कार्य करना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मनरेगा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या घटिया सामग्री का प्रयोग न हो। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता ही ग्रामीण समृद्धि और जनविश्वास की पहचान है, इसलिए इन कार्यों में पारदर्शिता और मजबूती दोनों अनिवार्य हैं।सरकार की ओर से पहले ही सभी मुख्य विकास अधिकारियों और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयकों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि मनरेगा योजनांतर्गत निर्माणाधीन और निर्मित परिसंपत्तियों की गुणवत्ता की गहन जांच की जाए। इस कार्य के लिए प्रदेशभर में स्टेट क्वालिटी मॉनीटर (स्क्तरू) तैनात किए गए हैं, जो नियमित रूप से योजनाओं की समीक्षा और परीक्षण करते हैं।शासन स्तर से जारी आदेशों के तहत निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण अनिवार्य किया गया है। मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी कार्य निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जाएं। इसी क्रम में परियोजना निदेशकों, उपायुक्त (श्रम एवं रोजगार) तथा उपायुक्त (मनरेगा) को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी कार्य नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ पूरे हों।जानकारी के अनुसार, मनरेगा के अंतर्गत निर्मित और निर्माणाधीन परिसंपत्तियों की गुणवत्ता जांच दो चरणों में की जाती है — एक बार निर्माण के दौरान और दूसरी बार निर्माण पूरा होने के बाद। स्टेट क्वालिटी मॉनीटर इस दौरान सुधारात्मक सुझाव और आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं, जिनका अनुपालन संबंधित अधिकारियों द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार की मंशा ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है, ताकि गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके और ग्रामीण जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
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