हरिद्वार,20 नवंबर (आरएनएस)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में गुरुवार को बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं आन्त्रप्रेन्योरशिप विषय पर आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता, लाछू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पूर्व निदेशक प्रो. बीपी नागोरी ने कहा कि आज का दौर विज्ञान और तकनीक में निरंतर होने वाले नवाचारों और शोध का है। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध या आवष्किार को बौद्धिक सम्पदा के तहत पेटेंट कराना शोधार्थियों, संस्थानों, उद्योगों और समाज झ्र सभी के लिए लाभकारी होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि फार्मा और मेडिकल क्षेत्र में आज अनेक नई मेडिकल डिवाइस, दवाएं और निदान तकनीकें विकसित हो रही हैं, जिन्हें शोधकर्ता पेटेंट करा रहे हैं। इससे देश में शोध और नवाचार की गति तेज हुई है तथा भारत की ड्रग और डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। प्रो. नागोरी ने शोधार्थियों को बौद्धिक संपदा के संरक्षण, संवर्धन, रज्ट्रिरेशन और फाइलिंग प्रक्रिया की वस्तिार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शोध को पहले दिन से दस्तावेजीकृत करने और उसे रजस्टिर कराने की आदत विकसित करनी चाहिए। पेटेंट प्राप्त कर छात्र शक्षिा के साथ आर्थिक लाभ भी अर्जित कर सकते हैं, जिससे भवष्यि में देश का शोध और अनुसंधान क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। कार्यक्रम का आयोजन भेषज विज्ञान विभाग एवं विश्वविद्यालय बौद्धिक सम्पदा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संचालन विभागाध्यक्ष डॉ. कपिल कुमार गोयल ने किया। इस अवसर पर प्रकोष्ठ के डिप्टी डायरेक्टर डा. चिरंजीव बनर्जी, डॉ. निशांत, तथा विभाग के डॉ. विपिन कुमार, डा. विनोद नौटियाल, डॉ. अश्वनी कुमार, डा. प्रिंस प्रशांत शर्मा उपस्थित रहे।
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