पुणे ,15 फरवरी (आरएनएस)। महाराष्ट्र में 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान को लेकर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष और स्वराज्य की तुलना टीपू सुल्तान से किए जाने के बाद यह बवाल शुरू हुआ। इस विवादित बयान के बाद पुणे बीजेपी के शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने सपकाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत मालेगांव महानगरपालिका में उप महापौर के दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने के बाद हुई थी, जिसने अब एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले लिया है।
कांग्रेस भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन, फूंके गए पोस्टर
छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से किए जाने के विरोध में पुणे में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान के खिलाफ हिंदुत्ववादी और विभिन्न सामाजिक संगठन आक्रामक रूप से सड़कों पर उतर आए हैं। इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुणे स्थित कांग्रेस भवन के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने हर्षवर्धन सपकाल और टीपू सुल्तान की तस्वीरों पर काले रंग का स्प्रे छिड़का और उनके पोस्टर व बैनर भी जलाए। पुणे के पर्वती पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद हुए इस उग्र आंदोलन से यह स्पष्ट हो गया है कि संगठनों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
आखिर कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
इस विवाद की जड़ें मालेगांव से जुड़ी हैं, जहां इस्लाम पार्टी की शेख नसरीन खालिद मेयर चुनी गई हैं। जब उप महापौर निहाल अहमद के दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई गई, तो राज्यभर में सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इस कदम को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए मालेगांव की मेयर को चेताया था। इसी बीच, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने यह कहकर आग में घी डालने का काम किया कि जैसे शिवाजी महाराज ने देशवासियों को बहादुरी और आजादी की सोच दी थी, वैसा ही काम टीपू सुल्तान ने भी किया था। सपकाल ने तर्क दिया कि इसलिए टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के बराबर माना जाना चाहिए।
तस्वीर हटाने को लेकर आमने-सामने बीजेपी और उप महापौर
सपकाल के इस बयान के बाद लोग बुरी तरह भड़क गए हैं। बीजेपी नेता आचार्य तुषार भोसले ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर टीपू सुल्तान की तस्वीर नहीं हटाई गई, तो हिंदू समाज खुद इसे हटाने के लिए आंदोलन शुरू करेगा। आचार्य भोसले का तर्क है कि महानगरपालिका एक सार्वजनिक प्रशासनिक संस्था है, इसलिए वहां विवादित लोगों की तस्वीरें नहीं लगाई जानी चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों। वहीं दूसरी ओर, मालेगांव के उप महापौर निहाल अहमद अपनी जिद पर अड़े हैं। उनका साफ कहना है कि टीपू सुल्तान की तस्वीर उनके ऑफिस में ही रहेगी और यह वे खुद तय करेंगे कि दफ्तर में किसकी तस्वीर लगानी है या हटानी है।
हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ एफआईआर की मांग
शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने का यह पूरा मामला अब पुलिस थाने तक पहुंच चुका है। पुणे में बीजेपी पदाधिकारी की ओर से इस मुद्दे पर सपकाल के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में मांग की गई है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 192, जो दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाने से संबंधित है, और धारा 196, जो धर्म, जाति, भाषा या नस्ल के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और घृणा को बढ़ावा देने से जुड़ी है, के तहत सख्त एफआईआर दर्ज की जाए।
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