-वैज्ञानिको द्वारा मृदा नमूनों के 12 पैरा मीटर के विश्लेषण के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी
अयोध्या 23 फरवरी (आरएनएस)। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत जनपद/तहसील स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में कार्यरत तकनीकी कार्मिकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारम्भ संयुक्त कृषि निदेशक अयोध्या मण्डल डा. अवतीन्द्र कुमार मिश्र द्वारा किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अयोध्या मण्डल के जनपद अयोध्या, अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर, बाराबंकी एवं अमेठी जनपद में कार्यरत समस्त तकनीकी कार्मिकों को आने वाले 15 वर्षों में कृषि का स्वरूप कैसा होगा पर विस्तृत चर्चा की गयी एवं मृदा परीक्षण की गुणवत्ता एन0ए0बी0एल0 की गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्थित करने के निर्देश दिये। मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर चयनित फसलों पर उर्वरक कम्बीनेशन मात्रा में प्रदर्शित होना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये जिससे कृषकों को उर्वरकों के संयोजन बनाने में सुविधा हो सके। संयुक्त कृषि निदेशक ने प्रयोगशाला कार्मिकों को प्रयोगशाला की गुणवत्ता के साथ-साथ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता के बारे में जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर/ब्लाक/स्तर/जनपद पर उर्वरता सूचकांक तैयार कर क्षेत्रीय कार्मिकों को उपलब्ध कराते हुए जनपद में विभाग द्वारा संचालित सभी गोष्ठियों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में किसानों को उर्वरता स्तर की जानकारी/एडवायजरी दी जाय जिसका किसान अपने खेतों में प्रयोग कर उर्वरक की असंतुलित प्रयोग से बच सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कर रहे सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण/कल्चर) अयोध्या मण्डल डा. सुभाष चन्द्र वर्मा ने प्रयोगशाला के समस्त तकनीकी कार्मिकों को मृदा नमूना विश्लेषण की विभिन्न विधियों के बारे में विस्तृत चर्चा की साथ में कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष श्री शाही, वैज्ञानिक डा. पंकज कुमार सिंह द्वारा सभी कार्मिकों को मृदा नमूना लेने की विधि एवं उर्वरक प्रयोग की विधि के बारे में बताया गया। चार दिवसीय प्रशिक्षण में विशेषज्ञ/ वैज्ञानिको द्वारा मृदा नमूनों के 12 पैरा मीटर के विश्लेषण के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इससे आगामी वर्षो में मृदा के स्तर में अपेक्षित सुधार दिखाई देने लगेगा इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में समस्त तकनीकी कार्मिकों को यह भी बताया गया कि जिस क्षेत्र में मृदा परीक्षण किया जाय वहा के किसानो को खेत के मृदा के बारे में विस्तृत रूप से समझाया जाय ताकि किसान असंतुलित उर्वरक के प्रयोग से बच सके। समस्त तकनीकी कार्मिकों को यह भी निर्देशित किया गया कि किसानो को मृदा परीक्षण कराने हेतु प्रेरित करे जिससे कि जनपद में मृदा के स्तर को सुधारा जा सके।
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