नई दिल्ली ,26 फरवरी । अगर आप बैंकिंग ऐप खोलते ही बार-बार आने वाले ऑफर, भ्रामक नोटिफिकेशन या चेकआउट के समय सामने आने वाले छिपे शुल्क (हिडन चार्ज) से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। क्रद्गह्यद्गह्म्1द्ग क्चड्डठ्ठद्म शद्घ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड (क्रक्चढ्ढ) ने डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी और ग्राहक-हितैषी बनाने के लिए सख्त रुख अपनाया है।
केंद्रीय बैंक ने ‘क्रद्गह्यश्चशठ्ठह्यद्बड्ढद्यद्ग क्चह्वह्यद्बठ्ठद्गह्यह्य ष्टशठ्ठस्रह्वष्ह्ल ्रद्वद्गठ्ठस्रद्वद्गठ्ठह्ल ष्ठद्बह्म्द्गष्ह्लद्बशठ्ठह्य, 2026Ó के मसौदे में बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप से सभी ‘डार्क पैटर्नÓ (ष्ठड्डह्म्द्म क्कड्डह्लह्लद्गह्म्ठ्ठह्य) को जुलाई 2026 तक पूरी तरह हटा दें। जो कि ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए डिजाइन की गई ट्रिक्स हैं। इसमें बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों और किसी भी सेवा की पेशकश से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति अनिवार्य रूप से लें। क्रक्चढ्ढ के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उचित जानकारी के बिना उत्पाद खरीदने या शुल्क चुकाने के लिए गुमराह कतई न किया जाए। बैंकों को ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना वित्तीय उत्पादों को एक साथ बेचने पर भी रोक लगा दी जाएगी।
क्रक्चढ्ढ क्यों डार्क पैटर्न पर सख्त?
डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी डिजाइन तकनीकें हैं, जिनका उद्देश्य यूजर के व्यवहार को प्रभावित करना होता है, जिसे वे आसानी से पूरी तरह समझ न सकें। इनमें हिडन चार्ज, भ्रमित करने या प्रलोभन देने वाले विकल्प या फिर ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं स्वीकार करने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं। बैंकों को इन ट्रिक्स पर रोक के संबंध में आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश, ये सुनिश्चित करने के लिए हैं, कि ग्राहकों को ठीक से पता हो कि वे किस चीज के लिए साइन-अप कर रहे हैं। यानी वे गुमराह न हों।
जुलाई तक हटाने होंगे डार्क पैटर्न
बैंकों को जुलाई 2026 तक डार्क पैटर्न को पूरी तरह से हटाने और नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया है। क्रक्चढ्ढ द्वारा मोबाइल बैंकिंग (रूशड्ढद्बद्यद्ग क्चड्डठ्ठद्मद्बठ्ठद्द) पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं को आसान, निष्पक्ष और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए है।
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