लखनऊ 26 फरवरी (आरएनएस ) समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि ‘पीडीए दिवसÓ एक नई शुरुआत है, जो सांकेतिक रूप से पीडीए समाज के उन सभी महान व्यक्तियों को समर्पित है जिन्होंने हर पीडि़त, दुखी और अपमानित व्यक्ति के मान-सम्मान, उत्थान और बराबरी के लिए संघर्ष किया तथा किसी भी वर्चस्ववादी ताकत का साथ नहीं दिया।उन्होंने कहा कि आज समस्त पीडीए समाज इस निर्णय से हर्षित है कि मान्यवर कांशीराम जैसे अनेक महापुरुषों के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प पुनर्जीवित किया जा रहा है। उनका कहना था कि ऐसे कई लोग भी इस पहल से अंदर ही अंदर प्रसन्न हैं, जो किसी कारणवश खुलकर अपना पक्ष नहीं रख पा रहे हैं या वे कहने को विवश हैं जो वे वास्तव में कहना नहीं चाहते।अखिलेश यादव ने कहा कि जरूरी नहीं कि कलम जिसकी हो, शब्द भी उसी के हों। हमेशा ऐसा नहीं होता कि जो लिख रहा है, भाव भी उसी के हों। कई बार लिखने वाला और लिखवाने वाला अलग होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज को बांटकर सत्ता बनाए रखने की नकारात्मक और विभाजनकारी राजनीतिक ताकतें अक्सर इस प्रकार की साजिशें करती हैं और लोगों को मजबूर करती हैं।उन्होंने कहा कि जिन वरिष्ठजनों का हम सम्मान करते हैं, उनके प्रति हमारी सहानुभूति भी है। हम अपने बड़ों और संबंधों को मन से निभाते हैं। ऐतिहासिक तिरस्कार की पीड़ा से जुड़े लोग एक सूत्र में बंधे हैं। उन्होंने दोहराया कि हम सब एक ही हैं, हम सब पीडीए हैं, क्योंकि जो पीडि़त है, वही पीडीए है।
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