नई दिल्ली ,31 मार्च,। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक बेहद अहम और बड़ा फैसला लिया है। कल यानी 1 अप्रैल से देश भर में चीनी मूल के इंटरनेट कनेक्टेड सीसीटीवी कैमरों की बिक्री पर सख्त पाबंदियां लागू होने जा रही हैं। सरकार के इस कदम के बाद अब बिना कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा किए कोई भी कंपनी अपने कैमरे भारतीय बाजार में नहीं बेच पाएगी। यह फैसला सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
कैमरा कंपनियों को माननी होंगी ये सख्त शर्तें
नए सरकारी नियमों के अनुसार, अब भारत में सीसीटीवी कैमरा बनाने और बेचने वाली सभी कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स का पूरा डेटा सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कंपनियों को यह भी पुख्ता करना होगा कि इन डिवाइस से रिकॉर्ड होने वाला कोई भी डेटा किसी भी हाल में भारत के बाहर ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। अगर कोई कंपनी इन सख्त नियमों की अनदेखी करती है, तो उसके उत्पादों पर देश में पूरी तरह से बैन लगाया जा सकता है।
हिकविजन और डाहुआ जैसी चीनी कंपनियों की बढ़ेगी मुश्किलें
सरकार के इस नए फरमान से विशेष रूप से चीन की प्रमुख कैमरा कंपनियों की नींद उड़ गई है। हिकविजन और डाहुआ जैसे बड़े चीनी ब्रांड्स के भारतीय बाजार पर इसका सीधा और गहरा असर पडऩे की संभावना है, क्योंकि अब इनके अधिकतर प्रोडक्ट्स नए और कड़े सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के दायरे में आ जाएंगे। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब सभी सीसीटीवी उपकरणों को सरकारी लैब से अनिवार्य रूप से टेस्टिंग करवानी होगी और सर्टिफिकेशन लेना होगा। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, लोकल स्टोरेज और हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की बारीक जानकारी भी सरकार को देनी होगी।
क्या भारतीय ब्रांड्स के लिए खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते?
केंद्र सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस बड़े और साहसिक कदम से देश की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने में काफी मदद मिलेगी। विदेशी सर्वरों पर संवेदनशील डेटा के लीक होने या उसके दुरुपयोग का खतरा अब खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, विदेशी और खासकर चीनी कंपनियों पर लगाम कसने से बाजार में स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कैमरा ब्रांड्स के लिए तरक्की के नए व बड़े अवसर पैदा होंगे।
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