नई दिल्ली 03 April, (Rns): सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की परीक्षाओं के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। क्वेश्चन पेपर पर छपे क्यूआर (QR) कोड को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां तेजी से फैल रही थीं। इन अफवाहों पर पूरी तरह से विराम लगाते हुए अब बोर्ड ने गुरुवार को एक बेहद अहम एडवाइजरी जारी की है। इस आधिकारिक एडवाइजरी में बोर्ड ने साफ कर दिया है कि इन कोड्स का असली काम क्या है और परीक्षा के दौरान इन्हें पेपर पर क्यों प्रिंट किया गया है।
इंटरनेट लिंक नहीं, बल्कि इंटरनल सिस्टम का है हिस्सा
कई लोगों के बीच यह अफवाह थी कि यह कोड कोई इंटरनेट हाइपरलिंक है, जिसे स्कैन करने पर कोई खास वेबसाइट खुलेगी। हालांकि, सीबीएसई ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया है कि ये क्यूआर कोड सीधे तौर पर इंटरनेट से जुड़ने के लिए बिल्कुल नहीं बनाए गए हैं। बोर्ड के मुताबिक, ये कोड ऑथेंटिकेशन, पेपर की ट्रैकिंग और परीक्षा की विश्वसनीयता व पारदर्शिता (एग्जामिनेशन इंटेग्रिटी) बनाए रखने के लिए इंटरनल सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जब कोई व्यक्ति इन्हें स्कैन करता है, तो यह किसी वेब लिंक के रूप में नहीं खुलता है, बल्कि यह सिर्फ वही टेक्स्ट दिखाता है जो इसके अंदर एनकोड किया गया है।
गूगल सर्च को लेकर बोर्ड ने दी ये जरूरी जानकारी
इसके साथ ही बोर्ड ने स्कैनिंग के दौरान आने वाली तकनीकी परेशानी को भी विस्तार से समझाया है। सीबीएसई का कहना है कि जब कोई यूजर स्कैन किए गए टेक्स्ट पर सीधे गूगल सर्च का इस्तेमाल करता है, तो कई बार गूगल सर्च इंजन उस टेक्स्ट से मिलते-जुलते कुछ दूसरे शब्द या परिणाम दिखाने लगता है। इसी वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। हालांकि, बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि गूगल क्रोम (Google Chrome) जैसे किसी भी स्टैंडर्ड वेब ब्राउजर पर कोड का इस्तेमाल करने पर ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। बोर्ड ने सभी छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बिना वजह पैनिक न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही ऐसी गुमराह करने वाली बातों पर ध्यान न दें।

