नई दिल्ली,28 अपै्रल (आरएनएस)। आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में मर्जर को राज्यसभा के सभापति की मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को आप की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गईं. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में पहुंचकर स्वाति मालीवाल ने प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद योगेंद्र चंदोलिया और प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल की उपस्थिति में बीजेपी की सदस्यता ली. प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उन्हें भाजपा का पटका पहनाकर पार्टी में शामिल किया.
बता दें कि 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 10 में से 7 सांसदों को भाजपा में विलय करने की घोषणा की थी. उसके बाद उसी दिन शाम को अशोक मित्तल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. वहीं, उसके तीन दिन बाद उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आप पार्टी के सातों राज्यसभा सांसदों के गुट को बीजेपी में विलय को मान्यता दे दी. इस मंजूरी के बाद सातों सांसदों की सदस्यता दल बदल कानून के तहत जाने का खतरा टल गया.
राजनीतिक विश्लेषक बद्रीनाथ ने कहा कि नियम के तहत जब किसी दल के दो तिहाई सांसद या विधायक अलग गुट बनाकर किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय करते हैं तो उन पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता है. इसी नियम के तहत अब आप सांसदों के गुट के भाजपा में विलय करने के कारण अब इन पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा. राजनीतिक विश्लेषक बद्रीनाथ ने ये भी कहा कि आम आदमी पार्टी द्वारा सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को भेजी गई सिफारिश ना मंजूर हो जाएगी.
बता दें कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में नेता संजय सिंह ने राज्यसभा की सेक्रेटरी जनरल को सातों सांसदों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश भेजी थी. सोमवार को उपराष्ट्रपति के आप सांसदों के गुट के मर्जर को भाजपा में शामिल होने के विलय को मंजूरी को भी चुनौती देते हुए संजय सिंह ने फिर से राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को पत्र भेजा. हालांकि, उस पत्र पर अभी तक राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब दल बदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर होने के बाद आने वाले समय में बचे हुए सात में से तीन सांसद भी आधिकारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे.
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