जेल में निरूद्ध बंदियों व मुलाकातियों को मिलेगी मुफ्त विधिक मदद
सीजेएम, सचिव विधिक सेवा और जेल अधीक्षक की रही मौजूदगी
जिला कारागार के अंदर ही अब बंदियों को मिलेगा कानूनी समाधान
बस्ती 15 मई (आरएनएस)। बंदियों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला जज शमसुल हक ने गुरुवार को जिला कारागार में कानूनी सहायता हेल्प डेस्क का विधिवत शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य उन बंदियों और उनके मुलाकातियों को कानूनी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करना है, जो आर्थिक तंगी या जानकारी के अभाव में अपने केस की पैरवी नहीं कर पा रहे हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान जिला जज के साथ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संदीप सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेन्द्र कुमार प्रथम और जेल अधीक्षक शिव प्रताप मिश्र, जेलर राजीव मिश्र, उप कारापाल रोशन व वंदना मिश्र मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने फीता काटकर हेल्प डेस्क का उद्घाटन करने के पश्चात और वहां तैनात होने वाले पैराबैधानिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) को आवश्यक निर्देश दिए। इस मौके पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि जिला कारागार में आरंभ की गई यह पहल गरीब और लाचार बंदियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस मौके पर लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ कौशल किशोर श्रीवास्तव, डिप्टी चीफ शैलजा कुमार पांडेय व असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल नितिश कुमार श्रीवास्तव व दीप्ति पांडेय मौजूद रहीं।
हेल्प डेस्क से होने वाले लाभ:
इस हेल्प डेस्क के माध्यम से जेल में बंद कैदियों और उनके मुलाकातियों को
मुफ्त में विधिक सलाह दी जाएगी। आर्थिक तंगी की वजह से अपना वकील न कर पाने वाले बंदियों को सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाएगा। उन्हें अपने केस की जानकारी दी जाएगी। बंदियों को उनके केस की वर्तमान स्थिति और अगली तारीखों से अवगत कराया जाएगा। अपील और जमानत के विषय में अपडेट जानकारी पीएलवी के माध्यम से उनको मिलती रहेगी। समय पर जमानत याचिका और उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने में मदद करना।सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलेगा। बंदियों और उनके स्वजन के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
निरीक्षण और संवाद:
उद्घाटन के पश्चात जिला जज और न्यायिक अधिकारियों ने कारागार परिसर बने लीगल एड क्लीनिक व बंदियों की आनलाइन पेश के लिए बने वीडियो कांफ्रेसिंग कक्ष का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बंदियों के संबंध में जेल अधिकारियों जानकारी ली। जेल अधीक्षक को निर्देश दिए गए कि वे सुनिश्चित करें कि प्रत्येक पात्र बंदी उसके मुलाकाती को इस हेल्प डेस्क का लाभ अवश्य मिले।
संविधान के अनुसार न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, चाहे वह जेल के अंदर हो या बाहर। इस हेल्प डेस्क के शुरू होने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी बंदी प्रभावी कानूनी पैरवी के अभाव में जेल में न रहे। न्याय से कोई भी बंदी वंचित न रहे।
शमसुल हक जिला एवं सत्र न्यायाधीश बस्ती
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