रतलाम 10 जून (आरएनएस)। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा केबिनेट बैठक मे निर्णय लेकर मंडी शुल्क जो 1त्न था उसको 1.5त्न करने का मंडियो मे व्यापक विरोध शुरू हो गया है। आज इसी कड़ी मे दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन रतलाम के अध्यक्ष सुरेंद्र चत्तर व सचिव हितेश मेहता, संघर्ष शील लहसुन प्याज़ व्यापारी संघ अध्यक्ष नीलेश बाफना व सचिव प्रकाश जादव, युवा मंडी व्यापारी संघ अध्यक्ष दिलीप मेहता, पूर्व मंडी व्यापारी प्रतिनिधि मनोज जैन, अभय सेठिया, कांतिलाल चोपड़ा ,हेमकांत दवे, संचय वोरा,धर्मेंद्र माहेष्वरी,अभिषेक धूत, डॉ. बी. एल. मेहता, कैलाश ओरा, राजेन्द्र बाफना,राजेश धूपिया,पंकज जैन,देवेंद्र बाफना,लोकेश चोपड़ा,भारत भूषण देवड़ा, नरेंद्र दुग्गड़ , वर्धमान बरडिया, सैय्यद मुख्तियार अली, संजय जोशी आदि ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मांग की है की देश के प्रधानमंत्री जी द्वारा कृषि सुधार कानूनों के माध्यम से कृषि उपज के स्वतंत्र एवं व्यापक विपणन की जो परिकल्पना की गई थी, उसका मूल उद्देश्य किसानों को अधिक विकल्प प्रदान करना तथा पूरे देश को एक विशाल कृषि बाजार के रूप में विकसित करना था। यदि वह व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू हो पाती तो कृषि उपज के व्यापार को नई दिशा मिलती तथा किसानों को व्यापक लाभ प्राप्त होता।
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य होने के नाते प्रधानमंत्री जी की भावनाओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में सुधारों का अग्रणी उदाहरण प्रस्तुत कर सकता था। किंतु वर्तमान में प्रदेश का किसान एवं व्यापारी बढ़ते हुए मंडी शुल्क तथा अन्य प्रशासनिक बोझों से चिंतित है। मंडी शुल्क में वृद्धि का सीधा प्रभाव कृषि उपज की लागत पर पड़ता है, जिसका भार अंतत: आम उपभोक्ता को वहन करना पड़ता है। जब केंद्र सरकार देश के करोड़ों नागरिकों को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है, तब कृषि उपज पर अतिरिक्त मंडी शुल्क का भार तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता। यह भी चिंताजनक है कि मंडी शुल्क से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक एवं संस्थागत व्यय में खर्च हो जाता है, जबकि किसानों एवं कृषि अवसंरचना के विकास पर अपेक्षाकृत सीमित राशि व्यय होती है।
वस्तु एवं सेवा कर (त्रस्ञ्ज) लागू होने के पश्चात केंद्र एवं राज्य सरकारों के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यदि प्रदेश के विकास हेतु अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता हो तो उसके लिए अन्य वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जा सकता है, किंतु कृषि क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना उचित नहीं होगा। अन्य राज्यों मे मंडी शुल्क 0.5त्न से 1त्न है शुल्क बढऩे से अन्य राज्यों के व्यापारियों से प्रतिस्पर्धा मे भी तकलीफ पड़ेगी। अत: मंडी शुल्क वृद्धि के इस निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेकर प्रदेश के किसानों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करें।

