अयोध्या 7 जुलाई (आरएनएस)। राज्य सभा सांसद, उप नेता विरोधी दल राज्य सभा प्रोमोद तिवारी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुये कहा है कि अयोध्या में 124 करोड़ रुपये भगवान श्रीराम के मंदिर के कार्यक्रम में खर्च कर दिये गये। जन्मभूमि पर झण्डा फहराने पर 10 करोड़ रुपये और पण्डाल लगाने के नाम पर 114 करोड़ रुपये खर्च किये गये, ये खुली लूट है, और जनता के पैसे की डकैती है, जिस तरह से इन कार्यकमों में इतनी बड़ी धनराशि खर्च की गयी है, वह समझ से परे है। इसमें सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
श्री तिवारी ने कहा है कि भगवान श्रीराम के दरबार में जो लूट की गयी है, और भगवान श्रीराम के भक्तों के साथ विश्वास घात किया गया है उसके लिये भा.ज.पा. सरकार को सजा देने के लिये जनता को भगवान श्रीराम के भक्तों को तैयार रहना चाहिए। थर्म के नाम पर भगवान श्रीराम के नाम पर जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, और खुलेआम धन की लूट की जा रही है। श्री तिवारी ने कहा है वर्ष 1980 से मैंने इस आन्दोलन को बहुत करीब से देखा है और पर्यटन मन्त्री के रूप में श्रीराम की पैड़ी बनाने में, श्रीराम कथा पार्क बनाने में मेरा योगदान रहा है। आज मैं सब कुछ लुटते हुये देख रहा हूँ। जो इंसान के साथ धोखा करता है उसे भगवान माफ करते हैं और जो स्वयं भगवान श्रीराम के साथ पाप कर रहा है, धोखा करता हे उसे दुनिया में कोई नहीं माफ कर सकता है।
श्री तिवारी ने भगवान श्रीराम के मंदिर में चन्दा के चढ़ावे पर हुई लूट पर 06 जुलाई, 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि इससे मैं एवं मेरे जैसे करोड़ों राम भक्तों को बेहद निराशा, हताशा और दु:ख हुआ है। उन्होंने कहा है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि, जिन पर कोष की रक्षा/देख रेख की जिम्मेदारी है, उनके रहते भगवान श्रीराम के चन्दे चढ़ावे में चोरी हो गयी है। यदि कोष में हेराफेरी हुई है, लूट हुई है और बरामदगी भी हुई है तो क्या इसके लिये स्वयं कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि जी जिम्मेदार नहीं है ? किन्तु वही कोषाध्यक्ष स्वयं प्रेस कान्फ्रेंस करके सफाई दे रहे हैं, और इस प्रकरण के सबसे चर्चित मुख्य अभियुक्त हैं चंपत राय तथा अनिल मिश्रा का बचाव कर रहे हैं। इनसे न्याय की और इंसाफ की उम्मीद नहीं की जा सकती है, अब श्रीराम भक्तों को जागना होगा और दोषियों को सजा देनी होगी। श्री तिवारी ने कहा है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा देना क्या एक नाटक था, कानून विद पाराशर जी जब स्पष्ट कह दिया कि एक बार यदि इस्तीफा हो गया तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता वरना इस्तीफा देना भी महज एक नाटक ही था । श्री तिवारी ने कहा है कि भगवान श्रीराम का मंदिर भारतीय जनता पार्टी ने नहीं बनवाया है बल्कि भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से बना है। भा.ज.पा. का कोई योगदान इसमें नहीं है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

